उत्तर प्रदेश सरकार ने आउटसोर्सिंग भर्ती प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’ की स्थापना का निर्णय लिया है। यह नया निगम भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और कर्मचारियों के शोषण पर रोक लगाने के उद्देश्य से बनाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कदम से हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों को स्थायित्व और समय पर वेतन मिलने की गारंटी होगी।
आउटसोर्सिंग भर्ती प्रक्रिया में खत्म होगी धांधली
✅ भर्ती में पारदर्शिता: सिफारिश और गड़बड़ी खत्म करने के लिए नए नियम लागू होंगे।
✅ सीधी नियुक्ति प्रक्रिया: सभी भर्तियां सरकारी निगम के माध्यम से होंगी, एजेंसियों की भूमिका खत्म होगी।
✅ ऑनलाइन चयन: विभागीय अधिकारियों की मनमानी रोकने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भर्ती प्रक्रिया संचालित होगी।
कैसे काम करेगा ‘उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम’?
? चरण 1: सरकारी विभाग निगम को आवश्यक कर्मचारियों की लिस्ट भेजेंगे।
? चरण 2: निगम योग्यता और सामाजिक संवेदनशीलता के आधार पर कर्मचारियों का चयन करेगा।
? चरण 3: सभी चयनित कर्मचारियों को आईडी कार्ड और प्लेसमेंट लेटर जारी किया जाएगा।
? चरण 4: मासिक वेतन निगम सीधे कर्मचारियों के खाते में ट्रांसफर करेगा।
भर्ती के लिए नए मानदंड: योग्यता के साथ सामाजिक समावेशन
? सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी।
? ग्रामीण क्षेत्र के उम्मीदवारों और कम पारिवारिक आय वालों को अवसर मिलेगा।
? विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को विशेष वरीयता दी जाएगी।
? साक्षात्कार नहीं होगा, जिससे चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होगी।
मानदेय और वेतन भुगतान में सुधार
सरकार ने विभिन्न पदों के लिए न्यूनतम वेतन तय किया है, जिससे कर्मचारियों को समय पर भुगतान की गारंटी मिलेगी।
कर्मचारी श्रेणी | मासिक वेतन (₹) |
श्रेणी 1 (विशेषज्ञ पद) | ₹25,000 |
श्रेणी 2 (तकनीकी पद) | ₹21,500 |
श्रेणी 3 (सहायक पद) | ₹18,500 |
श्रेणी 4 (अन्य पद) | ₹15,000 |
अब सभी कर्मचारियों को हर महीने तय तारीख पर वेतन मिलेगा। इससे पहले 3-4 महीने तक वेतन न मिलने की समस्या खत्म हो जाएगी।
आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नए युग की शुरुआत
✅ रोजगार में पारदर्शिता और निष्पक्षता आएगी।
✅ मानदेय में देरी की समस्या पूरी तरह खत्म होगी।
✅ गरीब और पिछड़े वर्गों को प्राथमिकता मिलेगी।
✅ सरकार की जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह पहल न सिर्फ एक आधुनिक प्रशासनिक सुधार है, बल्कि बेरोजगार युवाओं और हाशिए पर खड़े तबके के लिए सुनहरा अवसर भी है।